Wednesday, 3 April 2013
सोर्ह-सत्रमा.....
सोर्ह-सत्रमा बैस लुकायौ
भन कतिलाई? बाटो ढुकायौ
रोक्यौ भमराको आक्रमण
या फूलझै पत्रदल फुकायौ
चुमे कतिले जवानी तिम्रो
या जवानी ब्यर्थै सुकायौ?
छरयौ हाँसो ओठमा कती
या मुल्य आशूको चुकायौ
देख्दैछु, ओईलिएछौ गुलाब झै
अध्बैसे भयौ मन दु:खायौ
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