यो दसैंमा कैयौ मुटु, चर्किये होला घरतिर
अक्षता र जमराले, पर्खिये होला घरतिर
ठुला ठुला झोला बोकी,दसैं मान्न ठाटिँएर
कमाउन ग'का लाहुरे,फर्किये होला घरतिर
परेलिको डिल बाट, चाहुरिएको गाला माथि
सम्झी मलाई आशुँ हरु, दर्किये होला घरतिर
अक्षता र जमराले, पर्खिये होला घरतिर
ठुला ठुला झोला बोकी,दसैं मान्न ठाटिँएर
कमाउन ग'का लाहुरे,फर्किये होला घरतिर
परेलिको डिल बाट, चाहुरिएको गाला माथि
सम्झी मलाई आशुँ हरु, दर्किये होला घरतिर
No comments:
Post a Comment